लो आजकल बड़े अजीब -अजीब दिन आ रहे हैं ,पाश्चात्य संस्कृति से आयातित “प्रपोज डे “.
इस बात का भी डे होने लगा |
अगर पहले ही दिल आ गया तो इस दिन का इन्तेजार करते करते वह दूसरे की हों जायेंगी|
चाकलेट डे ! ये अच्छा हैं ,रोज -रोज का खर्चा बचता हैं .कह देंगे चाकलेट डे को खिलाएंगे |
वहाँ[पश्चिम] लोग भौतिक चीजों के पीछे इतने परेशान होतें हैं ,की बेचारे प्रेम का इजहार भी एक ही दिन वलेंटाइन डे को कर पातें हैं |
हमारे भारत में हर दिन वलेंटाइन डे ,मदरस् डे,फादर्स डे ,होता हैं |हम हर दिन बिना माँ बाप के आशीर्वाद के ,नही बिताते क्यूंकि हम उनके लिए और वो हमारे लिए सब कुछ हैं |मनोज कुमार की फिल्म ‘पूरब और पश्चिम‘ में एक डायलाग हैं “पूरब में माँ बाप के लिए संतान ही सब कुछ हैं “.
हिंदुस्तान में माँ -बाप अपनी संतान को संस्कार देते हैं ,परवरिश करतें हैं ,हाल में ही पढ़ने में आया की नार्वे में बच्चों को जरूरत समझने पर अलग रखा जाता हैं ,बड़ा होने के बाद माँ बाप से मिलाया जाता हैं |जैसा की भारतीय दम्पति के पुत्र -पुत्री को उनसे अलग कर दिया गया था |
हर देश की अपनी संस्कृति हैं |
हों सकता हैं की जो हमे अस्छा लगता हों ,उस देश की संस्कृति के अनुसार बुरा हों|
प्यार की बात हैं तो इसका सबसे सीधा सिद्धांत हैं‘”यदि आपको बहुत प्यार पाना हैं तो—–
१]सबको बिना शर्त माफ कर देना होंगा|
२]सबको बिना शर्त प्रेम करना होंगा |
३]असीम प्रेम अपने हृदयों से बाहर निकालके चारो तरफ ऐसा बाटना हैं की कोई ना बचे ,सीमाएं ना रहें ,बस मर्यादाये कायम रहें |
फिल्म ‘बुड्ढा होंगा तेरा बाप ‘में एक डायलाग हैं “आज का यूथ फ्रस्टेट हैं, लड़की पटाना भूल गया हैं उन्हें जबरदस्ती से पाना चाहता हैं “
हर दिन बढ़ रही ओछी घटनाएं ,घटिया मानसिकता की उपज हैं |बीमार मानसिकता हैं , ये लोग जो हर दिन इन आरोपों में पकडे जाते हैं ,कही ना कही से मानसिक वीमार हैं ,किसी ना किसी तरह |
हमे एक स्वास्थ्य समाज बनाना हैं ऐसे नकारात्मक लोगों पे अपना फोकस ना रखके सकारात्मक सोचना हैं क्यूंकि
“उर्जा वही बहती हैं ,जहां ध्यान रहता हैं “
-अजय कुमार यादव ,